Bihar Board Class 12th Physics 30 Vvi Subjective Question 2027: बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 में देने वाले विद्यार्थियों के लिए भौतिक विज्ञान (Physics) का 30 महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न बताया गया है। जो परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
यदि आप 12वीं की परीक्षा देने वाले है तो इस प्रश्न को जरूर याद कर लें।
Bihar Board Class 12th Physics 30 Vvi Subjective Question 2027 – ये सभी प्रश्न को रट्ट लो
1. आवेश संरक्षण सिद्धांत क्या है ?
उत्तर:- आवेश एक संरक्षित राशि है। इसे न तो उत्पन्न किया जा सकता है, और ना ही नष्ट किया जा सकता है। इसे एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया सकता है।
2. विद्युत फ्लक्स को परिभाषित करें, इसका SI मात्रक भी लिखें ।
उत्तर:- विद्युत क्षेत्र में रखें किसी पृष्ठ से लंबवत गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र या बल रेखाओं की संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं। विद्युत फ्लक्स एक अदिश राशि है। इसका SI मात्रक v-m होता है।
3. गाउस के नियम को लिखें ।
उत्तर:- “किसी वैद्युत-क्षेत्र में स्थित बन्द पृष्ठ से निर्गत सम्पूर्ण वैद्युत-फ्लक्स का मान उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का (1/६०) गुना होता है।”
Ø =q/६०
4. आवेश के रेखीय घनत्व का अर्थ बताइए।
उत्तर:- किसी चालक अथवा अचालक पदार्थ की प्रति एकांक लम्बाई पर उपस्थित आवेश को उसका रेखीय घनत्व कहते हैं। यदि L लम्बाई के चालक पर एकसमान रूप से फैला हुआ आवेश q हो, तब आवेश का रेखीय घनत्व σ = (q/L) कूलॉम/मीटर ।
5. विद्युत क्षेत्र की तीव्रता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:- विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर रखें परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल तथा परीक्षण आवेश के अनुपात को उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (intensity of electric field) कहते हैं। विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को E से प्रदर्शित करते हैं।
E = F/q
6. वैद्युत बल रेखाएं एक दूसरे को क्यों नहीं काटती हैं ? क्या समविभवी सतह एक दूसरे को नहीं काट सकती हैं ?
उत्तर:- यदि दो वैद्युत बल रेखा एक दूसरे को काटती है तो उस कटान वाले बिंदु पर हम दो स्पर्श रेखा खिंच सकते है। अर्थात उस बिंदु पर हमें विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएँ प्राप्त होती है जो कि संभवनहीं है, और चूँकि दो विद्युत बल रेखाओं के आपस में काटने पर उस बिंदु पर दो दिशाएँ प्राप्त हो जाती है जो संभव नहीं है ।
7. समविभव पृष्ठ से आप क्या समझते हैं
उत्तर:- वैद्युत क्षेत्र में स्थित ऐसा पृष्ठ जिस पर स्थित प्रत्येक बिन्दु प्रेमान विभव पर हो, समविभव पृष्ठ कहलाता है। अतः स्पष्ट है कि समविभव पृष्ठ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच वैद्युत विभवान्तर शून्य होता है।
8. समांतर प्लेट संधारित्र में दूसरे प्लेट का क्या कार्य है ?
उत्तर:- संधारित्र की दूसरी प्लेट वास्तव में पहली प्लेट के विभव को निरंतर कम करने तथा प्लेटों के बीच अधिक से अधिक आवेश को संचित कर उसकी धारिता को बढ़ाने का कार्य करती है।
9. वायुमण्डल वैद्युत उदासीन होता है ? क्यूँ ?
उत्तर:- हमारे वायुमण्डल में मुख्यतः नाइट्रोजन, आक्सिजन, कार्बन- डाइआक्साइड तथा जल वाष्प जैसी गैसें पाई जाती हैं। सूर्य से आने वाली काज्मिक किरणें जब वायुमण्डल से होकर गुजरती हैं तो इन्हें आयनित कर देती हैं, जिससे सम्पूर्ण वायुमण्डल आवेशित हो जाता है तथा उदासीन नहीं रह पाता है।
10. समझावें की किरचॉफ का द्वितीय नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम है ।
उत्तर:- किसी बन्द पाश में आवेश के गति करते समय ऊर्जा में होने वाली वृद्धि तथा हानि समान होती हैं अर्थात् आवेश की ऊर्जा में परिणामी परिवर्तन शून्य होता है। इस प्रकार किरचॉफ का द्वितीय नियम नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है।
11. विद्युतीय नेटवर्क के लिए किरचॉफ के दोनों नियम लिखें।
उत्तर:- जटिल वैद्युत परिपथों को सरलता से हल करने के लिए सन् 1842 ई० में भौतिकविद् गुस्टाव किरचॉफ ने निम्नलिखित दो नियम प्रतिपादित किए-
1. प्रथम नियम अथवा सन्धि नियम (First Law or Junction Rule):- किसी किसी (दिष्ट दिष्ट धारा धारा वैद्युत वैद्युत परि परिपथ की किसी सन्धि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
द्वितीय नियम या लूप का नियम (Second Law or Law of Loop) :- “किसी वैद्युत परिपथ के बन्द पाश अथवा लूप (closed mesh or loop)के विभिन्न खण्डों में ” प्रवाहित धाराओं एवं उनके संगत प्रतिरोधों के गुणनफलों का बीजगणितीय योग उस पाश में कार्य करने वाले समस्त वैद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।”
12. थॉमसन या सीबेक प्रभाव को लिखें तथा समझाएं ।
उत्तर:- एक अकेली धातु के दो भागों के मध्य विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, यदि ये भिन्न भिन्न तापमान पर है। यह थामसन प्रभाव कहलाता है।
यदि भिन्न भिन्न धातु के दो तारों को इस प्रकार जोड़ा जाए कि ये दो संधि बनाये। इस प्रकार की व्यवस्था को ताप युग्म कहा जाता है। जब एक ताप युग्म की दो संधियों को भिन्न भिन्न तापमान पर रखा जाए तो तार से धारा का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है। यह सीबैंक प्रभाव कहलाता है तथा परिपथ में उत्पन्न विद्युत वाहक बल तापीय विद्युत वाहक बल कहलाता है।

13. अन्योन्य प्रेरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:- किन्हीं दो निकटवर्ती कुण्डलियों में से किसी एक कुण्डली में धारा परिवर्तन के कारण दूसरी कुण्डली में वैद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की घटना को अन्योन्यै प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण : ट्रांसफॉर्मर तथा प्रेरण कुण्डली ।
14. फैराडे का द्वितीय नियम लिखिए ।
उत्तर:- किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित वैद्युत वाहक बल का परिमाण परिपथ चुंबकीय फ्लक्स के मान में परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
15. चुम्बकीय फ्लक्स की परिभाषा एवं S.I. मात्रक लिखें।
उत्तर:- एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ से लम्बवत् गुजरने वाली ॥ चुम्बकीय बल रेखाओं की कुल संख्या को उस पृष्ठ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स कहते हैं। इसे, Φ (फाई) से प्रदर्शित करते हैं। इसका SI मात्रक बेवर या न्यूटन-मीटर / एम्पियर होता है।
16. फैराडे का प्रथम नियम लिखिए ।
उत्तर:- जब किसी परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के मान में परिवर्तन होता है तो परिपथ में एक प्रेरित वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है, यह वैद्युत वाहक बल केवल तभी तक प्रेरित रहता है जब तक की परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में निरंतर परिवर्तन होता रहता है ।
17. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है? इसके लिए क्या-क्या प्रतिबन्ध आवश्यक है ?
उत्तर:- जब कोई प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तथा आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है तब विरल माध्यम में प्रकाश की किरण का अपवर्तन नहीं होता है। बल्कि संपूर्ण प्रकाश परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आती है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
(i). प्रकाश किरण को सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
(ii). आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से अधिक होना चाहिए।
18. प्रकाश वर्ष किसे कहते हैं?
उत्तर:- प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी को प्रकाश वर्ष कहते हैं। एक प्रकाश वर्ष लगभग 9.4×10¹² किलोमीटर के बराबर होता है।
प्रकाश वर्ष तारों के बीच की दूरी को मापने का मात्रक है।
19. नेत्र की समंजन क्षमता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:- नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण नेत्र लेन्स की फोकस दूरी में परिवर्तन कर नजदीक व दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है।
20. प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक शर्ते लिखिए।
उत्तर:- प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए निम्नलिखित शर्तें हैं –
(i) पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश किरणों को सघन माध्यम में आपतित होना चाहिए।
(ii) आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
21. क्रांतिक कोण को परिभाषित करें और इसके शर्तें लिखें।
उत्तर:- जब प्रकाश की किरणें सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलंब से दूर हटती है तब
आपतन (i) कोण के मन को बढ़ने पर अपवर्तन (r) कोण का मान भी बढ़ता है। तब सघन माध्यम में आपतन कोण का वह मान जिसके लिए अपवर्तन कोण का मान 90 डिग्री होता है, क्रांतिक कोण कहलाता है।
शर्तें – क्रांतिक कोण के लिए प्रकाश किरणों को सघन माध्यम से विरल माध्यम में अपवर्तित किया जाना चाहिए।
22. न्यूटन के कणिका सिद्धांत को लिखें।
उत्तरः- न्यूटन के कणिका का सिद्धांत निम्नलिखित हैं–
1.) यह कणिका एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है तो परिवर्तित हो जाती है।
2.) इन कणिकाओं का वेग महत्तम होता है।
3.) ये कणिका सीधी रेखा में गमन करती है।
4.) इनका कणिकाओं को माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
5.) प्रकाश का विभिन्न रंग विभिन्न कणिकाओं के आकार के कारण होता है।
23. कार्य फलन क्या है? अथवा, किसी धातु के ‘कार्य फलन’ को परिभाषित करें।
उत्तरः- कार्य फलन किसी धातु पृष्ठ से इलेक्ट्रॉन के मात्र बाहर निकालने में जितनी ऊर्जा व्यय होती है उसे धातु का कार्य फलन कहा जाता है। इसे द्वारा सूचित किया जाता है। उदाहरण: सीजियम के लिए = 2.14 eV.
24. फोटॉन के गुणों को लिखें।
उत्तर:- फोटॉन के गुण
(1) फोटॉन विद्युतः उदासीन होते हैं।
(2) विकिरण ऊर्जा फोटॉन के रूप में होता से गमन करती है।
(3) फोटॉन का विवर्तन हो सकता है।
(4) फोटॉन की ऊर्जा E = hv होती है जहाँ v आवृत्ति h प्लांक नियतांक ।
25. नैज अर्धचालक एवं अपद्रव्यी अर्धचालक में अंतर लिखें।
उत्तरः- नैज अर्धचालक – नैज अर्धचालक शुद्ध अर्धचालक को ही नैज अर्धचालक कहा जाता है। इन्हें तात्विक अर्धचालक भी कहा जाता है।
अपद्रव्यी अर्धचालक – जब शुद्ध अर्धचालक में थोड़ा सा अपद्रव्य मिला दिया जाए तो इसकी चालकता बहुत अधिक बढ़ जाती है। इस प्रकार के अर्धचालक को अपद्रव्यी अर्धचालक कहा जाता है।
26. संचार क्या है एवं संचार व्यवस्था के आवश्यक तत्व कौन-कौन है ?
उत्तरः- संचार – सूचना या संकेत या सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की प्रक्रिया को संचार कहा जाता है। संचार व्यवस्था के मुख्यतः आवश्यक तत्व इस प्रकार है –
(i) प्रेषित (ii) चैनल या माध्यम (iii) अभिग्राही
27. हाइगैस का तरंग सिद्धांत क्या है?
उत्तर:- (i). प्रकाश का संचरण तरंगों के रूप में होता है।
(ii). प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती हैं इसी कारण से इसमें ध्रुवण की क्रिया होती है।
(iii). पूरे ब्रह्मांड में इथर का माध्यम है।
(vi). प्रकाश की चाल तरंग के रूप में 3× 10 मीटर/सेकंडके रूप में गमन करते हैं।
(v). प्रकाश तरंग के रूप में गमन करता है इसी कारण से प्रकाश में व्यतिकरण विवर्तन तथा ध्रुवण की मटना होती है।
28. ट्रांसफार्मर क्या है? परिणमन अनुपात क्या है?
उत्तरः- ट्रांसफार्मर का कार्य, उच्च धारा पर निम्न प्रत्यावर्ती वोल्टता को निम्न धारा पर उच्च वोल्टता में तथा निम्न धारा पर उच्च प्रत्यावर्ती वोल्टता को अधिक धारा पर निम्न वोल्टता में परिवर्तित करना है।
परिणमन का अनुपात ट्रांसफॉर्मर की द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या (Ns) तथा प्राथमिक कुण्डली में फेरों की संख्या (Np) का अनुपात परिणमन अनुपात कहलाता है। इसे से प्रदर्शित करते हैं।
29. अनुचुम्बकीय पदार्थ तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के बीच दो व्यवहारिक गुणों से अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:- प्रतिचुंबकीय पदार्थों के गुण–
1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति का मान ऋणात्मक तथा अल्प होता है।
2. इन पदार्थों की अपेक्षिक चुंबकशीलता का मान 0-1 के बीच होता है।
अनुचुंबकीय पदार्थों के गुण–
1. अनुचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति का मान धनात्मक तथा अल्प होता है।
2. इन पदार्थों की अपेक्षिक चुंबकशीलता का मान 1-2 के बीच होता है।
30. पृथ्वी के चुम्बकीय तत्वों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:- किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए तीन राशियों को होना आवश्यक है। इन राशियों को पृथ्वी के चुम्बकत्व तत्व कहते हैं। ये निम्न हैं-
(i) दिक्पात कोण किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योतर व चुम्बकयोत्तर के बीच बनने वाला कोण उस स्थान का दिक्पात का कोण कहते हैं।
(ii) नमन कोण किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की कुल तीव्रता की दिशा तथा चुम्बकीय याम्योतर में क्षैतिज रेखा बीच का कोण नमन के कोण कहलाता है।
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक को पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक कहलाता है
SOME IMPORTANT LINKS
| 12th Physics Subjective PDF | Download Now |
| Join WhatsApp Group | Click Here |
| Official Website | Click Here |
| Home Page | Click Here |
